Budget 2026 Expectations: भारत सरकार जल्द ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट (Union Budget 2026) पेश करने वाली है। हर साल की तरह इस बार भी देश के हर वर्ग—चाहे वह वेतनभोगी मध्यम वर्ग हो, अन्नदाता किसान हो या फिर छोटे उद्योगपति। सबकी नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे पर टिकी हुई हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हर साल की तरह, वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट (Union Budget 2026) केवल एक वित्तीय लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब संसद में अपना बजट भाषण पढ़ेंगी, तो देश की नजरें इस बात पर होंगी कि सरकार 'राजकोषीय अनुशासन' (Fiscal Discipline) और 'आम आदमी को राहत' के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
2025 के बजट ने नई टैक्स रिजीम को काफी आकर्षक बनाया था, लेकिन 2026 से उम्मीदें और भी बड़ी हैं क्योंकि भारत अब अपनी अर्थव्यवस्था को $5 ट्रिलियन से आगे ले जाने के महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है।
1. इनकम टैक्स (Income Tax): मध्यम वर्ग की बड़ी आकांक्षाएं
भारत का वेतनभोगी वर्ग (Salaried Class) अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा स्तंभ है। पिछले कुछ वर्षों में महंगाई दर (Inflation) में उतार-चढ़ाव के कारण मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (Purchasing Power) पर असर पड़ा है। बजट 2026 से टैक्सपेयर्स को निम्नलिखित बड़ी उम्मीदें हैं:
क. स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) में बढ़ोतरी
वर्तमान में नई टैक्स रिजीम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 है। आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि रहने की लागत और चिकित्सा खर्चों में वृद्धि को देखते हुए इसे बढ़ाकर कम से कम ₹1,00,000 किया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो मध्यम वर्ग के हाथों में खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचेगा, जिससे बाजार में खपत (Consumption) बढ़ेगी।
ख. नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) का सरलीकरण
सरकार का स्पष्ट लक्ष्य टैक्सपेयर्स को पुरानी रिजीम से नई रिजीम की ओर ले जाना है। उम्मीद है कि बजट 2026 में ₹15 लाख तक की कुल आय को प्रभावी रूप से टैक्स फ्री किया जा सकता है (विभिन्न छूटों को मिलाकर)।
ग. पुरानी टैक्स रिजीम और धारा 80C
हालांकि सरकार नई रिजीम को बढ़ावा दे रही है, लेकिन करोड़ों लोग अभी भी पुरानी टैक्स रिजीम में हैं। धारा 80C की ₹1.5 लाख की सीमा 2014 से नहीं बदली गई है। इसे बढ़ाकर ₹2.5 लाख करने की मांग बहुत पुरानी है, ताकि लोग निवेश (LIC, PPF, ELSS) की ओर अधिक प्रोत्साहित हों।
2. संभावित इनकम टैक्स स्लैब 2026 (New Tax Regime)
अनुमानों के अनुसार, टैक्स स्लैब को और अधिक तर्कसंगत बनाया जा सकता है ताकि निम्न और मध्यम आय वर्ग को अधिकतम लाभ मिले:
संभावित इनकम टैक्स स्लैब 2026 (New Tax Regime)
आम आदमी को समझाने के लिए यहाँ एक अनुमानित टेबल दी गई है कि बजट के बाद टैक्स की स्थिति क्या रह सकती है (संभावित):
| कुल वार्षिक आय (₹) | वर्तमान टैक्स दर (2025) | बजट 2026 की संभावित उम्मीद |
|---|---|---|
| 0 - 4 लाख तक | शून्य | शून्य |
| 4 - 8 लाख तक | 5% | 5% (या छूट सीमा में विस्तार) |
| 8 - 12 लाख तक | 10% | 10% |
| 12 - 16 लाख तक | 15% | 12% - 15% |
| 16 - 20 लाख तक | 20% | 20% |
| 20 लाख से ऊपर | 30% | 25% - 30% |
3. शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड: निवेशकों का नजरिया
शेयर बाजार बजट के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होता है। बजट की एक घोषणा निफ्टी और सेंसेक्स को हजारों अंकों की बढ़त दे सकती है या गिरा सकती है।
क. कैपिटल गेन टैक्स (LTCG & STCG)
2024-25 में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) को 10% से बढ़ाकर 12.5% किया गया था। बजट 2026 में निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि दरों में कम से कम स्थिरता बनी रहे। यदि सरकार ₹1.25 लाख की टैक्स-फ्री सीमा को बढ़ाकर ₹2 लाख करती है, तो यह छोटे निवेशकों के लिए बहुत बड़ी राहत होगी।
ख. सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT)
ट्रेडर्स लंबे समय से STT को हटाने या कम करने की मांग कर रहे हैं ताकि ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम हो सके।
ग. म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए राहत
म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करने वालों की संख्या भारत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बजट में 'इंडेक्सेशन' (Indexation) के लाभ को लेकर स्पष्टता और डेट फंड्स (Debt Funds) पर टैक्स रियायत की उम्मीद की जा रही है। "बजट में होने वाले टैक्स बदलावों का सीधा असर आपके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो पर भी पड़ेगा, इसलिए निवेशकों को लॉन्ग-टर्म रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।"
4. कृषि क्षेत्र: 'अन्नदाता' के लिए बड़े ऐलान
भारत एक कृषि प्रधान देश है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के बिना 8-9% की जीडीपी वृद्धि हासिल करना असंभव है।
- पीएम-किसान सम्मान निधि: वर्तमान में किसानों को साल में ₹6,000 मिलते हैं। बढ़ती लागत को देखते हुए इसे बढ़ाकर ₹9,000 से ₹12,000 प्रति वर्ष करने की चर्चा जोरों पर है।
- एग्री-टेक स्टार्टअप्स: खेती में ड्रोन और एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार विशेष सब्सिडी दे सकती है।
- फूड प्रोसेसिंग: फसलों की बर्बादी रोकने के लिए कोल्ड स्टोरेज और मेगा फूड पार्क्स के लिए रिकॉर्ड बजट आवंटित होने की संभावना है।
5. बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और रियल एस्टेट
सरकार 'गति शक्ति' योजना के माध्यम से देश का बुनियादी ढांचा बदल रही है।
- रेलवे: वंदे भारत ट्रेनों के विस्तार और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए बजट बढ़ सकता है।
- होम लोन राहत: मिडिल क्लास के लिए घर खरीदना एक सपना होता है। धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली ₹2 लाख की छूट को बढ़ाकर ₹3 लाख करने की उम्मीद है।
6. स्वास्थ्य और शिक्षा: सामाजिक सुरक्षा पर जोर
- स्वास्थ्य बीमा (GST की मार): वर्तमान में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18% GST लगता है। इसे 5% करने या पूरी तरह हटाने की मांग की जा रही है ताकि आम आदमी के लिए बीमा सस्ता हो सके।
- शिक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन के लिए अधिक फंड और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जा सकता है।
7. क्या सस्ता होगा और क्या महंगा?
बजट में कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) के बदलावों से वस्तुओं की कीमतें तय होती हैं:
- सस्ता हो सकता है: मोबाइल पार्ट्स, चार्जर, कैमरा लेंस, सोलर पैनल, लिथियम-आयन सेल (EV के लिए)।
- महंगा हो सकता है: सिगरेट, तंबाकू उत्पाद, आयातित शराब, और विलासिता की वस्तुएं (Luxury Cars/Jewelry)।
8. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) और स्टार्टअप
MSME क्षेत्र रोजगार पैदा करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है।
- क्रेडिट गारंटी: छोटे व्यापारियों को बिना गारंटी के लोन की सुविधा का विस्तार।
- कॉर्पोरेट टैक्स: स्टार्टअप्स के लिए टैक्स हॉलिडे की अवधि को और एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
9. निष्कर्ष: भविष्य की अर्थव्यवस्था का ब्लूप्रिंट
बजट 2026 केवल एक वर्ष का बजट नहीं होगा, बल्कि यह 2047 के 'विकसित भारत' की नींव को और मजबूत करने वाला दस्तावेज होगा। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) को GDP के 4.5% के नीचे लाना और साथ ही विकास की गति को बनाए रखना है।
यदि वित्त मंत्री मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत देती हैं, तो इसका सीधा असर बाजार में खपत पर पड़ेगा, जिससे अंततः कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा और शेयर बाजार में तेजी आएगी। 1 फरवरी का दिन न केवल संसद के लिए, बल्कि भारत के हर नागरिक के बटुए (Wallet) के लिए निर्णायक होगा।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमानों पर आधारित है। यह केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह (Financial Advice) न माना जाए। बजट के आधिकारिक आंकड़े सरकार द्वारा संसद में पेश किए जाने के बाद ही स्पष्ट होंगे। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिमों के अधीन है, कृपया निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: बजट 2026 कब पेश किया जाएगा?
उत्तर: बर्तमान परंपरा के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026-27 को वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
प्रश्न 2: क्या बजट 2026 में इनकम टैक्स में छूट मिलेगी?
उत्तर: ऐसी प्रबल संभावना है कि सरकार 'नई टैक्स रिजीम' को बढ़ावा देने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ा सकती है और टैक्स स्लैब को और अधिक सरल बना सकती है।
प्रश्न 3: शेयर बाजार के लिए बजट 2026 क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: बजट में कैपिटल गेन टैक्स (LTCG/STCG) और एसटीटी (STT) से जुड़े फैसले सीधे तौर पर शेयर बाजार की दिशा तय करते हैं। साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस जैसे सेक्टरों के लिए आवंटन इन सेक्टर की कंपनियों के शेयरों को प्रभावित करता है।
प्रश्न 4: क्या पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) खत्म हो जाएगी?
उत्तर: सरकार का ध्यान नई रिजीम की ओर अधिक है, लेकिन फिलहाल पुरानी रिजीम के खत्म होने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। उम्मीद है कि इसमें निवेश छूट (जैसे 80C) की सीमा बढ़ाई जा सकती है।
प्रश्न 5: क्या वरिष्ठ नागरिकों को इस बजट से कुछ खास मिलेगा?
उत्तर: वरिष्ठ नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि बैंक एफडी (FD) पर मिलने वाले ब्याज की टैक्स-फ्री सीमा को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख किया जाए।

